samacharvideo: भारतीय इतिहास के काले दिनों की बात की जाती है तो जलियावाला बाग हत्याकांड को सबसे पहले याद किया जाता है। आज से 88 साल पहले 13 अप्रैल 1913 को अमृतसर के जलियावाला बाग़ में जनरल डायर के आदेश पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गयी थी। जिसमे सैकड़ो लोगों की जान चली गयी थी।

आइये जानते है जलियावाला बाग हत्याकांड से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  • यह हत्याकांड 13 अप्रैल 1913 को अमृतसर के जलियावाला बाग में हुआ था।
  • यह हत्याकांड बैशाखी के दिन ही हुआ था।
  • अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के निकट ही यह सब कुछ हुआ था।
  • शहर में बैशाखी पर कर्फ्यू लगा था, पर लोग इससे अंजान थे।
  • बैशाखी पर मेला घूमने आए लोगों को सभा की खबर लगी तो हजारों लोग जलियावाला बाग़ में इकट्ठे हो गए।
  • जनरल डायर अपने 90 ब्रिटिश सैनिकों समेत जलियावाला बाग में  घुस गए।
  • बिना किसी चेतावनी के गोलियां बरसाना शुरू कर दिया।
  • लगभग दस मिनट तक चली इस गोलीबारी में ब्रिटिश सेना की ओर से 1650 राउंड गोलियां बरसाई गयी।
  • इस हत्याकांड में 1000 लोग शहीद हुए तो 2000 से ज्यादा घायल हो गए थे।
  • बाग़ में मौजूद एक कुएं में कई लोग जान बचाने के लिए कुद गये। 
  • 120 लाशें कुएं से निकाली गयी थी।
  • आंकड़ों पर ध्यान दे तो अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर के पास मौजूद लिस्ट में 484 शहीदों के नाम है तो वहीँ जलियावाला बाग़ में 388 शहीदों की सूचि है।
  • पं मैदान मोहन मालवीय के अनुसार इस हत्याकांड में 1300 लोग शहीद हुए थे तो वहीँ स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार 1500 लोग शहीद हुए, अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन के अनुसार 1700 से अधिक लोग इस हत्याकांड में शहीद हुए थे।
  • सन 1997 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने अमृतसर में मौजूद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
  • सन 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड केमरिन ने विसिटर्स बुक में लिखा ‘ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।’
  • इस घटना से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने नया रूप लिया जिसमें पंजाब के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

    तो इस तरह हुआ था जलियावाला बाग़ हत्याकांड ! आप भी अंग्रेज़ो के दमन का विरोध करते हुए शहीदों को नम आँखों से श्रद्धांजलि जरूर दीजियेगा !

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