samacharvideo: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पंजाब और गोवा के आगामी विधानसभा में जमकर जुट गयी है। वहीँ एक प्रबल दावेदार के रूप में भी उभरी है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सीट अपने नाम करने के बाद ही ठान लिया की अबकी बार पंजाब पर भी ‘आप’ का ही दबदबा होगा। इसके बाद गोवा के लिए आम आदमी पार्टी तन मन धन से जुटी हुई है।

वहीँ दूसरी ओर देखा जाए तो आम आदमी पार्टी ने उत्तरप्रदेश और उत्तरप्रदेश 2017 विधानसभा चुनाव से पूरी तरह दुरी बना रखी है। इस पर सोचने वाली बात यह है कि आखिर जहां आम आदमी पार्टी हर राज्य में अपना दबदबा बनाना चाहती है फिर भी वह उत्तरप्रदेश की राजनीति से पूरी तरह दूर क्यों है ? इसके पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते है।

  • धन की कमी : केजरीवाल ने जिस तरह दिल्ली में अपना दम दिखाया है उसी तरह वे पंजाब में कारनामा कर दिखाने के पूरी ताकत से लग गए है। पर यूपी से दूरी बनाने के पीछे धन की कमी हो सकती है। क्योंकि पंजाब और गोवा छोटे राज्य है, वही यूपी बहुत बड़ा राज्य है। जहाँ केजरीवाल गोवा और पंजाब में चुनाव के लिए कम धन में काम चला सकते है। वही उत्तरप्रदेश में वे कम धन से काम नही चला सकते। इसलिए ही केजरीवाल, धन की कमी के चलते यूपी के रण में कूदने से पहले ही पीछे हट गए।
  • BJP-CONGRESS से टक्कर:  आदमी पार्टी उन प्रदेशों को पहले निशाना बना रही है, जहाँ भाजपा और कांग्रेस की सीधे टक्कर है। जहाँ कांग्रेस भारी विरोध से गुजर रही है, वहीँ केजरीवाल एक नए विकल्प के रूप में जनता के सामने आना चाहते है। सीधे तौर पर कहे तो, केजरीवाल अपनी जगह कांग्रेस की सीटों से भरना चाहते है। चूँकि उत्तरप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस, दोनों सियासत से काफी दूर है, इसलिए केजरीवाल यूपी से दूर है।
  • संसाधनों की कमी:  आदमी पार्टी के पास कार्यकर्ताओं के साथ साथ संसाधनों की भी कमी है। वह एक साथ बड़े स्तर पर अनेक राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए सक्षम नही है। aap के पास बड़े चेहरों की भी कमी है, साथ ही कार्यकर्ताओं का उतना बड़ा जत्था भी नही है। इसलिए केजरीवाल छोटे राज्यों से एक एक कर के आगे बढ़ने की राह पर अग्रसर है।
  • मजबूत कड़ियों को तोड़ना: केजरीवाल एक एक कर के भारतीय राजनीति की मजबूत कड़ियों पर निशाना बनाना चाहती है। शुरूआती दौर में वह भाजपा और कांग्रेस को निशाना बनाना चाहती है।

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