samacharvideo:  बॉलीवुड में आजकल उड़ने का बड़ा चलन है। कभी शाहिद कपूर अपनी फिल्म को ‘उड़ता पंजाब’ कर देते है तो कभी नीरजा और एयरलिफ्ट में आपको ऐरोप्लेन से उड़ाने का एहसास तक मिल जाता है। पर अपनी फिल्म ‘फिलोरी’ में आपको तगड़ा एंटरटेनमेंट मिलेगा, अरे भाई हां, उड़ने के लिए भी मिलेगा। पर इस बार कोई प्लेन या पंजाब नही उड़ेगा। उड़ेगा तो ‘फिलोरी’ का भूत। तो आइये जानते है 24 मार्च को रिलीज़ हुई अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘फिलोरी’में क्या है खास बात…

फिल्म: फिलोरी

डायरेक्टर: अंशाई लाल

स्टार कास्ट: अनुष्का शर्मा, दिलजीत दोसांझ, सूरज शर्मा, मेहरीन पीरज़ादा

रेटिंग: ★★★☆☆ 





कहानी: तो भई कहानी की शुरुआत होती है अपने कनन गिल और अनु की शादी की बात से। दरअसल अपना बंदा सिंगिंग के लिए कनाडा चला जाता है, और जब आता है तो उसकी शादी क्यूट सी बच्ची अनु से होनी होती है। बता दे की ये एक दूसरे से बचपन से प्यार के चंगुल में फसे हुए है। कहानी में ट्विस्ट आता है, लड़का मांगलिक निकलता है तो शादी पेड़ से करवाना पड़ता है। फिर क्या, होता वही है जो मंजूर खुदा होता है। पेड़ पर भूतनी शशि (अनुष्का) रहती है, गलती से अपना कनन फंस जाता है, हालत बुरी होती है तो वही शशि अपने 98 साल पुराने प्यार के किस्से कनन को बताती है। कहानी बढ़ती है फुल टू सस्पेंस और इमोशन के साथ और आखिरकार अंजाम वही हर बॉलीवुड की फिल्मों की तरह… संस्कारी क्लीमेक्स, हैप्पी एंडिंग ! अच्छा एंडिंग जानने के लिए आपको थिएटर जाकर 200 रुपया जरूर खर्च करना पड़ेगा।






डायरेक्शन: फिल्म के डायरेक्शन की बात करे तो यह अंशाई लाल की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म है। उस हिसाब से देखा जाए तो डायरेक्शन बहुत उम्दा रहा, खैर, कुछ और एक्सपेरिमेंट किये जा सकते थे, जिससे vfx ज्यादा एफ्फेक्टिव लग सकता था।




एक्टिंग: अनुष्का शर्मा की एक्टिंग आपका मन मोह सकती है, साथ ही दिलजीत दोसांझ, सूरज शर्मा ने भी बेहतर प्रदर्शन किया, दिलजीत दोसांझ एक सिंगर भी है, उस हिसाब से उन्होंने अपना किरदार बहजत अच्छे तरह से निभाया है, वहीँ ‘लाइफ ऑफ़ पाई’ के लंबे से के बाद बॉलीवुड में आये सूरज शर्मा ने अपने किरदार को सजाने में कोई कसर नही छोड़ी पर हल्की सी फीकी नजर जरूर आयी। वही बात करे मेहरीन पीरज़ादा की तो वे और भी बेहतर कर सकती थी। उनके एक्सप्रेशन आपको थोड़े बनावटी लग सकते है।



प्लस पॉइंट: फिल्म में अनुष्का शर्मा ने भूत का रोल अदा किया है, जिसमें उन्हें अच्छे धांसू vfx के साथ पेश किया गया है, जिसे फिल्म का आधार भी कहा जा सकता है। वहीँ स्टोरी की तरफ देखे तो यह एक उम्दा स्टोरी का प्रदर्शन है, जिसमे दो समय अंतरालों को एक धागे में बड़ी ही सहजता से पीरों दिया गया है। वहीँ इसमें महिलाओं के सम्मान और रूढ़िवाद को दिखाया गया है। जो आपको पसंद जरूर आएगा। फिल्म इसलिए भी देखना चाहिए की इसमें नयापन है…और स्टोरी के साथ एक्सपेरिमेंट भी है।




कमी: यदि फिल्म में भूत के vfx के साथ और भी दूसरे vfx को डाला जाता तो फिल्म अलग ही छाप छोड़ती। पंजाबी लेखों और पत्रिकाओं को आप बुझने में पीछे पड़ सकते है। जिस तरह से पंजाब के पुराने समय को दिखाया गया है, उस तरह से वहाँ की भाषा नजर नही आ पायी, जो थोड़ा अजीब लगता है।

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