samacharvideo: हिंदी स्टोरी: दोस्तों आज की इस स्टोरी में हम बात करेगे १ ऐसे बायोलॉजिस्ट की जिसने अपने बनाये हुए तरीके से मरे हुए इंसान को जिन्दा करने का दावा किया था । उसने इस शोध को काफी आगे ले गया और बाद में सफलता भी हासिल की ।

तो आज की इस स्टोरी में उस शक्श के बारे में जानेगे:-  Robert E. Cornish :ये नाम सायद अपने ना  सुना हो पर मैं  आपको बताना चाहता हु की  Robert E. Cornish  एक बहुत ही फेमस बायोलॉजिस्ट था जिसने अपने 21 साल  की उम्र ही उसने यूनिवरसिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया  से ग्रेजुएशन पूरा करके   मेडिकल प्रैक्टिस करने का लाइसेंस पाप्त कर  लिया था ।

रोबर्ट ने कई प्रकार के विचित्र प्रोजेक्ट पर काम किया जिसमे इंसान को मरने के बाद जिन्दा करना भी उसका 1 प्रोजेक्ट था ।लाइसेंस मिलने के करीब 8 साल बाद उसे ऐसा लगा की वो एक नए तरीके से मरे हुए इंसान को जिन्दा कर सकता है । उसका मानना था की अगर मरे हुए इंसान की नसों  में अगर खून का परवाह  फिर होने  लगे तो इंसान जिन्दा हो सकता है ।ओर इस थेओरी को लेकर उसने आगे काम किया ।
जिससे  वो मरे हुए व्यक्ति को  टी टी बोर्ड पर लेटाता  था दोस्तों टी टी बोर्ड बच्चो  के झूले की तरह होता है जिसने २ तरफ २ बच्चे बैठकर ऊपर नीचे  डाउन होते है (इमेज में आप देख सकते हो टी टी बोर्ड )

तो वो इस बोर्ड पर मरे हुए इंसान को लेटाकर जोर जोर से झुलाता  था  ताकि मरे हुए इंसान की बॉडी में खून का परवाह होने लगे |
लेकिन कई लोगो पर परिक्षण करने के बाद भी जब रोबर्ट को सफलता नहीं मिली तो उसने बताया की जिन लोगो पर परिक्षण किया गया वो सरे मरने के काफी ज्यादा समय बाद परिक्षण में सामिल हुए थे  । और उसने बताया की अगर मारने के तुरंत बाद अगर किसी इंसान पर यहाँ किया जाये तो संभावित है की सफलता मिलेगी पर उसे ऐसा कोई इंसान नहीं मिला परिक्षण के लिए जो तुरंत मरा  हो |

तब रोबर्ट ने फैशला किया  की वो यह परिक्षण जानवरो पर करेगा । तब उसने 5 कुत्तो को  परिक्षण में सामिल किया उन कुत्तो को रोबर्ट ने दम  घोटकर मारा । जिसके बाद जब परिक्षण किया गया तो पहले 3 कुत्तो को जिन्दा नहीं किया जा सका लेकिन २ कुत्तो  को पुनर्जीवित करने में सफलता प्राप्त हुयी । 

पर रॉबर्ट अब इस परीक्षण को इंसान पर  करना चाहता था जिसमे उसे 1 ऐसे इंसान की जरुरत थी  जो तुरंत मरा हो ।

कुछ दिनों बाद वह की गवर्मेंट ने 1 मुजरिम को मौत की सजा सुनाई थी 

उस मुजरीम ने इस परीक्षण में शामिल होने की इच्छा जाहिर की पर वह की सरकार ने उसे अपील नहीं दी। 

जिससे रोबर्ट ने हताश होकर इस परिक्षण पर काम करना छोड़ दिया।

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