samacharvideo: भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहाँ कई धर्मों और जातियों के लोग अपनी अपनी खुशियां त्योहारों के माध्यम से मनाते है, जिसके चलते पुरे देश में साल भर त्योहारों की धूम मची होती है।
ऐसा ही एक पर्व है बैशाखी ! बैशाखी मूलतः सिक्खों का त्यौहार होता है। पर इसे पूरा देश अपने अपने रिवाज़ और अपनी मान्यता के अनुसार मनाता है। आइये जानते है वैशाखी मनाने से जुड़ी मान्यताएं और वैशाखी से जुड़ी रोचक बातें….

  • बैशाखी का पर्व हर साल आज ही के दिन 13 अप्रैल को मनाया जाता है।
  • पहली वैसाख को पंजाबी नववर्ष का प्रारंभ फसलों के पकने और कटने की किसानों की खुशियां हैं। वैसाखी मुख्य रूप से समृद्धि और खुशियों का त्योहार है। इसके मनाए जाने का मुख्य आधार पहली वैसाख को पंजाबी नववर्ष का प्रारंभ फसलों के पकने और कटने की किसानों की खुशियां हैं।
  • बैशाखी मनाने के पीछे दूसरा कारण, इस दिन सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है, यह भी त्योहार मनाये जाने का एक कारण है।
  • बैशाखी के पीछे तीसरा सबसे बड़ा कारण, सिक्खो के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिह जी ने सिक्खो को खालसा के रूप मे संगठित किया था, तो यह भी इस दिन को खास बनाने का एक कारण है।
  • इस दिन सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है, यह भी त्योहार मनाये जाने का एक कारण है।
  • केरल में यह त्योहार ‘विशु’ कहलाता है। बंगाल में इसे नब बर्ष, असम में इसे रोंगाली बिहू, तमिल नाडू में पुथंडू और बिहार में इसे वैषाख के नाम से पुकारा जाता है।
  • बैशाखी को मौसम के बदलाव का पर्व भी कहा जाता है। इस समय सर्दियों की समाप्ति और गर्मियों का आरंभ होता है।

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