samacharvideo: भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहाँ के लोग अपने जीवन को खुशियों से भरने के लिए अनेकों त्यौहार मनाते है। इन त्यौहारों में कुछ त्यौहार पुरे भारत में मनाए जाते है तो कुछ सीमित क्षेत्रों में । ‘रामनवमी’ ऐसा ही एक त्यौहार है जो पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। हमारे देश को जहां राम-कृष्ण की धरती से भी पुकारा जाता है तो हमारा देश राम-कृष्ण के जन्म और उनके महान कार्य दिवसों को भी त्योहार के रूप में मनाता है। रामनवमी भी हमारे देश के उन बड़े त्योहारों में से एक है जिसे सारा देश एक साथ मनाता है।

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क्यों मनायी जाती है रामनवमी:

रामनवमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् राम का जन्म हुआ था। बाल्मीकि रामायण के अनुसार, राम का जन्म चैत्र मास की नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में अयोध्या के राजा दशरथ की पहली पत्नी कौशल्या के गर्भ से हुआ था। राम को मनुष्यों के लियव एक आदेश के लिये पूजा जाता है, इसीलिये उनके जन्मदिन को हमेशा धूमधाम से मनाया जाता है, जिसे हम रामनवमी कहते है।

 
कैसे की जाती है रामनवमी की पूजा:

भगवान् राम को अतुल्य शक्ति का भंडार माना जाता है। माना जाता है रामनवमी के दिन भगवान राम की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का अपार भण्डार लग जाता है।
रामनवमी के दिन सबसे पहले उठकर प्रातः काल में स्नान करना चाहिए और उसके बाद भगवान् सूर्य को प्रणाम करना चाहिए, सूर्य को शक्ति का प्रतीक माना जाता है साथ ही उन्हें भगवान् राम का पूर्वज भी कहा जाता है।
रामनवमी पर भगवान राम की पूजा के लिए आवश्‍यक वस्‍तुएं, रोली, ऐपन, चावल, जल, फूल, एक घंटी और एक शंख होते हैं। इसके बाद परिवार की सबसे छोटी महिला सदस्‍य परिवार के सभी सदस्‍यों को टीका लगाती है। पूजा में भाग लेने वाला प्रत्‍येक व्‍यक्ति के सभी सदस्‍यों को टीका लगाया जाता है। पूजा में भाग लेने वाला प्रत्‍येक व्‍यक्ति पहले देवताओं पर जल, रोली और ऐपन छिड़कता है, तथा इसके बाद मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल छिड़कता है। तब प्रत्‍येक खड़ा होकर आ‍रती करता है तथा इसके अंत में गंगाजल अथवा सादा जल एकत्रित हुए सभी जनों पर छिड़का जाता है। पूरी पूजा के दौरान भजन गान चलता रहता है। अंत में पूजा के लिए एकत्रित सभी जनों को प्रसाद वितरित किया जाता है।

वहीँ मंदिरों में रामनवमी के अवसर पर तुलसी रामायण का पथ किया जाता है। भगवान राम उनकी पत्‍नी सीता, भाई लक्ष्‍मण व भक्‍त हनुमान की रथ यात्राएं निकाली जाती है। भजन गान का आयोजन होता है, साथ ही भक्तों के लिए भंडारा-प्रसादी का भी आयोजन किया जाता है।

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