samacharvideo: आज शिवभक्तों का सबसे बड़ा पर्व है, शिवरात्रि ! भोले बाबा आज अपने भक्तों पर कृपा बरसाते है तो वहीँ भक्तगण भी शिव शम्भू को खुश करने के हर प्रयास को आजमाते है। यही नही शिवभक्त आज शिव के दर्शन के साथ ही उपवास भी करते है और शिवलिंग का शुद्ध दूध, जल और शहद से अभिषेक भी करते है। माना जाता है कि आज के दिन जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान् शिव की पूजा अर्चना करते है, उनकी हर मनोकामना शिव शंकर पूरी करते है।
भगवान् शंकर को भोलेनाथ भी कहा जाता है। पुराणों और मान्यताओं के अनुसार भगवान् शंकर ही है जो भक्तों की थोड़ी व् सरल पूजा से ही खुश हो जाते है, इसे लिए शंकर को भोलेनाथ भी कहा जाता है।

आइये जानते है, शिवरात्रि का यह पावन पर्व क्यों मनाया जाता है…

शिवरात्रि पर्व को मनाने के पीछे कई मान्यताएं है, जिनका उल्लेख हमें पुराणों और इतिहास में मिलता है। आइये जानते है, उन्हीं में से दो मुख्य कहानियां जो शिवरात्रि पर्व को मनाने के लिए ज्यादा प्रचलित है।

  • मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान् शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसी वजह से आज के दिन को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।
  • दूसरी मान्यता के अनुसार आज ही के दिन भगवान् शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था, इसी वजह से भगवान् शिव को नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा। यह विष समुद्र मंथन के दौरान निकला था, इससे पूरी दुनिया नष्ट हो सकती थी, इसी को बचाने के लिए भगवान् शिव ने विष को स्वयं ग्रहण कर लिया था। तभी से यह दिन भगवान् शिव के नाम से जाना जाता है और इसे शिवरात्रि पर्व के रूप में मनाया जाता है।

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