samacharvideo: देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी आज 92 वर्ष के हो चुके है। भारतीय राजनीति में अटल बिहारी का नाम राजनीति से कहीं बढ़कर है। अपने सरल और सामान्य व्यक्तित्व से अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति के साथ साथ लोगों के दिलों में भी अपनी अमिट छवि बनायी है। 

जब भी अटल बिहारी जी का नाम आता है, राजनीति का हर चेहरा फ़ीका मालुम पड़ता है। देश का हर नेता अटल बिहारी वाजपेयी जी को हमेशा से ही सम्मान की नजरों से देखता है। चाहे वह किसी भी दल का क्यों न हो ! अटल जी की छवि एक राजनेता से बढ़कर है। वह एक राजनेता के साथ साथ एक असामान्य व्यक्तित्व के धनि भी है। वे अपनी शालीनता और सरलता से सभी को अपनी ओर मोह लेने के अलग अंदाज के लिए भी जाने जाते है।

जन्म से शिक्षा तक…

अटल जी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ। इनके पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता जी का नाम कृष्णा देवी है। इनके पिताजी ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। अटल जी की माताजी अटल जी को अटल्ला कहकर पुकारती थी। अटल बिहारी वाजपेयी जी के पिताजी अध्यापक के साथ साथ एक अच्छे कवि भी थे। उन्हें ग्वालियर राज्य के सम्मानित कवि का सम्मान भी मिला था। अटल जी शिक्षा ग्वालियर में ही संपन्न हुई। ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से अध्ययन हुआ। कॉलेज लाइफ में ही अटल जी छात्र संगठन से जुड़ गए थे। इसी समय अटल जी ने कविताओं की रचना करना आरम्भ कर दिया। 1943 में कॉलेज यूनियन ले सचिव और 1944 में उपाध्यक्ष भी बने। राजनीति विज्ञानं में मास्टर्स किया। एक साथ में MA और LLB में प्रवेश लिया। कानपूर के DAV कॉलेज से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की।

राजनीति के पखवाड़े से…

बात अटल जी के राजनीतिक जीवन की करे तो अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत एक कम्युनिस्ट के रूप में की। 

  •  हिंदुत्व और राष्ट्र का झंडा फहराने के लिए उन्होंने साम्यवाद का दामन छोड़ RSS की सदस्यता ली। 
  • आरएसएस के जनसंघ के गठन के वक़्त अटल जी अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निजी सचिव रहे।
  • 1957 में पहली बार बलरामपुर से सांसद बने।
  • संसद में जाने पर कश्मीर मुद्दे पर संज्ञान लिया।
  • 1962 में जनसंघ की ओर से राज्यसभा गए।
  • 1967 से पुनः बलरामपुर से लोकसभा गए।
  • पुनः संसद जाने पर धरा 370 का विरोध किया और इसे हटाने के पक्ष में आये।
  • विश्व राजनीति में रूचि दिखाई।
  • 1975 आपातकाल में जेल गए।
  • आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी और अटल जी विदेश मंत्री बनाये गए।
  • 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में हिंदी में अपनी बात रखी।
  • 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ और इसमें अटल जी का स्थान शीर्ष नेताओं में था।
  • 1986 में फिर राजसभा गये।
  • 1996 में BJP सबसे आगे आयी और अटल जी पहली बार प्रधानमंत्री बने। खैर 13 दिनों के बाद ही उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा।
  • 1998 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।
  • 11 मई 1998 को परमाणु परीक्षण किये।
  • अप्रैल 1999 से अक्टूबर 1999 तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे।
  • 13 अक्टूबर 1999 को तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।

सम्मानों का दौर…

वैसे तो अटल जी को कॉलेज और साहित्य में अनेक सम्मान मिले, पर बात बड़े सम्मानों की करे तो…

27 मार्च 2015 को भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला।

  • 1992 में पदम् विभूषण
  • 1993 में डी.लिट्
  • 1994 लोकमान्य तिलक पुरस्कार
  • 1994 श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार
  • 1994 में पंडित गोबिंद वल्लभ पन्त पुरस्कार

प्रमुख रचनाये…

अटल जी एक साहित्यकार भी है..उनकी कविताओं में देशप्रेम का अनोखा संयोग दिखाई पड़ता है। उनकी प्रमुख रचनाये इस प्रकार है..

  • मृत्यु या हत्या
  • अमर बलिदान
  • कैदी सविराय की कुंडलियां
  • संसद में तीन दशक
  • अमर आग है
  • कुछ लेख, कुछ भाषण
  • सेक्युलर वाद
  • राजनीती की रपटीली राहें
  • बिंदु, बिंदु विचार…

कुछ ख़ास बाते…

  1. अटल जी ने शादी नही की।
  2. अटल जी एक राजनेता के साथ साथ अद्वितीय कविताकार भी है।
  3. इनके जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  4. पहले विदेश मंत्री जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण दिया।

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