samacharvideo: खादी ग्रामोद्योग के वार्षिक कैलेंडर और डायरी पर इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगायी गयी है, जिसको लेकर हर विपक्षी दल ने मोदी और केंद्र सरकार को घेर लिया है और हड़कम्प मचा दिया है। वही आपको बता दे कि इससे पहले इन कैलेंडर और डायरी पर महात्मा गांधी की तस्वीर हुआ करती थी। 

इस मुद्दें में एक नया खुलासा हुआ है जिससे मामले ने फिर तूल पकड़ ली है। दरअसल, यह बात सामने आ रही है कि जो तस्वीर खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर और डायरी पर लगाई गई है, वह प्रधानमंत्री और पीएमओ की इजाजत के बिना लगायी गयी है, जिससे नरेंद्र मोदी और पीएमओ काफी नाराज भी है।

इस संबंध में PMO ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) से जवाब मांगा है। वहीँ एक अधिकारी ने बताया कि  ‘पिछले साल अक्टूबर में मोदीजी ने लुधियाना में महिला बुनकरों के बीच 500 चरखे वितरित किए थे। इस घटना की वजह से कैलेंडर पर उनका फोटो छापने का फैसला हुआ।’ केवीआईसी के चीफ वी के सक्सेना हैं, जिन्हें 2015 में एनडीए सरकार ने नियुक्त किया था। उन्होंने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल संस्थान के मूल आदर्शों से मेल खाता है। उन्होंने कहा था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से खादी को बढ़ावा मिला है। इसलिए उनके फोटो का इस्तेमाल हुआ। सक्सेना ने बताया कि 2015-16 में खादी की बिक्री 34 पर्सेंट बढ़ी, जबकि उससे पहले के दशक में इसमें 2-7 पर्सेंट का इजाफा हुआ था।

वहीँ आपको बता दे की इससे पहले भी नरेंद्र मोदी की तस्वीरें बिना इजाजत के जियो और PAYTM के विज्ञापनों में लगाई जा चुकी है, जिसको लेकर भी विपक्ष ने हंगामा खड़ा किया था। 

आपको यह भी बता दे की इससे पहले भी बापू की तस्वीरें खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर से हटा कर आम इंसानों की फोटो लगायी जा चुकी है।

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