samacharvideo: यदि आज से पहले आप किसी सिनेमाघर या थिएटर में फिल्म देखने जाते थे तो राष्ट्रगान बजने पर आपको खड़े होना होता था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए आदेश भी जारी किया था, पर अब सुप्रीम कोर्ट ने इसमें संसोधन किया है। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर से संज्ञान लिया है और कहा कि, ‘किसी फिल्म, वृत्त चित्र या समाचार फिल्म की कहानी के हिस्से के रूप में राष्ट्रगान बजने के दौरान दर्शकों को खडा होने की जरूरत नहीं है।’
ध्यान देने वाली बात यह है कि, यह फैसला फिल्म के शुरुआत में बजने वाले राष्ट्रगान पर नही है। आपको अभी भी फिल्म के शुरुआत में बजने वाले राष्ट्रगान पर अनिवार्यता से खड़े होना होगा। खैर, फिल्म के बीच में आने वाले दृश्यों, समाचार अथवा विज्ञापन में राष्ट्रगान बजने पर खड़े होने पर अनिवार्यता नही है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक याचिका के स्पष्टीकरण में दिया जिसमें याचिकाकर्ताओं में से एक ने कहा कि शीर्ष अदालत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या फिल्म, वृत्त चित्र या समाचार फिल्म में राष्ट्रगान बजने पर भी दर्शकों से खडा होने की अपेक्षा है। इस पर न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने संज्ञान लेते हुए कहा कि, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि जब किसी फिल्म, समाचार फिल्म या वृत्तचित्र की कहानी के हिस्से के रूप में राष्ट्रगान बजता है तो दर्शकों को खडा होने की जरूरत नहीं है।’वहीँ इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित कर दी गयी है।
आपको बता दे कि, 30 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी सिनेमाघरों को आदेश दिया था कि फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाये और दर्शकों को इसके प्रति सम्मान में खडा होना चाहिए। 
याचिका के स्पष्टीकरण के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि, “अब समय आ गया है जब नागरिकों को यह अहसास होना चाहिए कि वे एक राष्ट्र में रह रहे है और राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दर्शाना उनका कर्तव्य है जो हमारी सांविधानिक राष्ट्रभक्ति और बुनियादी राष्ट्रीय उत्कृष्टता का प्रतीक है।”

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