samacharvideo:  1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने वाला है, जिसके लिए सरकार ने आवश्यक वित्तीय विधेयक लोकसभा से पास करवा लिया है। राज्यसभा से इस विधेयक को पास करवाने की आवश्यकता नही है। नए वित्तीय वर्ष 2017-2018 के शुरू होत्व ही कई नए नियम कायदे भी लागू हो जाएंगे, जो बैंक खाताधारकों और आम आदमी के जेब पर भारी पड़ सकते है।

इस नए वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स को लेकर कई नए अहम् बदलाव होंगे जो इस तरह है…

  • ढाई लाख से 5 लाख रुपये के बीच की इनकम वालों का टैक्स 10 फीसद से घटाकर 5 फीसदी कर दिया जाएगा। हालांकि, सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाली 5000 रुपये की छूट को घटाकर 2500 रुपये कर दी गई है।
  • 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक की वार्षिक आय वाले लोगों को 10 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा
  • एक जुलाई से पैन कार्ड बनवाने और इनकम टैक्‍स दाखिल करने के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा। सरकार ने कालेधन की रोकथाम के लिए नकद लेनदेन की सीमा भी 3 से घटाकर अब 2 लाख रुपए कर दी गई है। यदि कोई व्‍यक्ति दो लाख रुपए से अधिक का लेनदेन करते पाया जाता है तो उसे इस सीमा से अधिक राशि पर 100 प्रतिशत जुर्माना देना होगा।
  • पांच लाख रुपए की सालाना आय वाले व्‍यक्तिगत करदाताओं के लिए सुविधा के लिए टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए एक पेज का फॉर्म पेश किया जाएगा।
  • यदि सर्च ऑपरेशन के दौरान 50 लाख रुपए से अधिक की अघोषित आय या संपत्ति का पता चलता है तो आयकर अधिकारी पिछले 10 साल के कर मामलों को दोबारा खोल सकते हैं। वर्तमान में कर अधिकारियों को पिछले छह साल के दस्‍तावेजों की ही छानबीन करने का अधिकार हासिल है। समय पर अपना रिटर्न फाइल नहीं करने वाले करदाताओं को आकलन वर्ष 2018-19 के लिए 10,000 रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
  • राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्‍कीम में निवेश पर आकलन वर्ष 2018-19 के लिए किसी भी प्रकार का कर लाभ नहीं मिलेगा। इस टैक्‍स सेविंग स्‍कीम की घोषणा वित्‍त वर्ष 2012-13 में की गई थी। यह योजना प्रतिभूति बाजार में पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए शुरू की गई थी।
  • लांग टर्म गेन के लिए किसी संपत्ति के होल्डिंग पीरियड को 3 साल से घटाकर अब 2 साल कर दिया गया है। यदि कोई व्‍यक्ति संपत्ति खरीदकर उसे 2 साल के भीतर ही बेच देता है तो उसे इस पर होने वाले लाभ पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स देना होगा। यदि इस संपत्ति की बिक्री खरीदने की तारीख से दो साल बाद की जाती है तो उस पर कोई टैक्‍स देय नहीं होगा।
  • प्रतिमाह 50,000 रुपए से अधिक के किराये का भुगतान करने वाले व्‍यक्ति को अब 5 प्रतिशत टीडीएस (स्रोत कर कर) काटना होगा। कर विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से ऐसे व्‍यक्ति जिनकी रेंटल इनकम बहुत अधिक है, वो कर के दायरे में आ जाएंगे। यह नियम एक जून 2017 से प्रभावी होगा।
  • नेशनल पेंशन सिस्‍टम (एनपीएस) से आंशिक निकासी/आहरण पर कोई टैक्‍स नहीं लगेगा। प्रस्‍तावित बदलावों के अनुसार, एनपीएस सब्‍सक्राइबर्स अपने अंशदान का 25 प्रतिशत हिस्‍सा रिटायरमेंट से पहले आपातकालीन स्थिति में निकाल सकेंगे। यह याद रखें कि रिटायरमेंट पर कुल फंड का 40 प्रतिशत हिस्‍सा ही कर मुक्त होता है। 

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