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फिल्म : काबिल 

डायरेक्टर: संजय गुप्ता 

स्टार कास्ट: रितिक रोशन, यामी गौतम, रोनित रॉय, रोहित रॉय 

अवधि: 2 घंटा 19 मिनट 

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 4/5 स्टार

कोई मिल गया, कृष, काइट्स जैसी फिल्मों की सफलता के बाद राकेश रोशन ने यह फिल्म भी अपने बेटे ऋतिक रोशन के लिए प्रोड्यूस की है। संजय गुप्ता इस फिल्म के डायरेक्टर है । ऋतिक और संजय ने पहली बार साथ में काम किया है। देखते है, बाप और बेटे की यह जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा पाती है या नही।

स्टोरी: 

फिल्म की शुरुआत डबिंग आर्टिस्ट रोहन भटनागर से होती है जिसका रोल रितिक रोशन ने निभाया है रोहन भटनागर अपनी आंखों से देख नहीं पाता है वह दिव्यांग होता है। रोहन का दिन जहां डबिंग स्टूडियो में गुजरता है तो रात घर पर ।डबिंग आर्टिस्ट रोहित का एक ही सपना होता है कि उसे एक बहुत प्यार करने वाली लड़की मिले जितने वह शादी करके अपना घर बसा लें और अपनी भी लाइफ हंसी-खुशी गुजार ले।

 कुछ समय बाद रोहन की जिंदगी में सुप्रिया की एंट्री होती है । जिसका रोल यामी गौतम ने निभाया है । पहली मुलाकात में  सुप्रिया रोहन की बातों से इंप्रेस हो जाती है। वही आपको बता दें कि सुप्रिया भी दिव्यांग होती है। दोनों की बातचीत बढ़ती है और कुछ समय बाद दोनों शादी कर लेते हैं। जिंदगी हंसी खुशी आगे बढ़ती है पर दो कारपोरेट की वजह से रोहन की जिंदगी से सुप्रिया हमेशा के लिए चली जाती है। रोहन इसका  बदला लेता है आखिर में जीत सच की होती है ।कहानी को विस्तार से जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी पड़ेगी।

क्यों देखें ‘काबिल’…?


यदि आप इमोशनल फिल्म और रोमांस से भरी जुगलबंदी का शौक रखते हैं तो यह फिल्म आपको पूरी तरह से घेर लेगी इस फिल्म को देखकर आप गदगद हो जाएंगे और तारीफ में तालियां जरूर बजाएंगे फिल्म देखने के बाद आपको ऐसा महसूस नहीं होगा कि आपके पैसे बेवजह जाया नही हुए। यह फिल्म पूरी तरह रितिक रोशन पर आधारित है रितिक रोशन की एक्टिंग और दिव्यांग होने का तरीका आपको खासा पसंद आएगा यही इस फिल्म की खासियत भी है।

रितिक रोशन की बेहतरीन अदाकारी एक बार फिर से देखने को मिली है जो आपको इमोशनल करने के साथ सोचने पर भी विवश करती है। यामी गौतम और रितिक ने दिव्यांग किरदार बखूबी निभाया है। रोनित रॉय और उनकी डायलॉग डिलीवरी भी कमाल की है। नरेंद्र झा और सुरेश मेनन का काम भी सहज है। हालांकि फिल्म की कहानी के बारे में तो ट्रेलर से पता चल ही गया था, बावजूद इसके फिल्म देखते वक्त बोरियत नहीं होती। यही फिल्म का यूएसपी है। फिल्म के गानों की खासियत हे कि वो कहानी को आगे लेकर जाते हैं। फिल्म की सिनोमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है जो कि संजय गुप्ता की फिल्मों की खासियत भी है।

फिल्म में दिव्यांग के हिसाब से रिसर्च वर्क ठीक है, जैसे पैसों की समझ, सुनने की परख, खाना पकाना इत्यादि। साथ ही दिव्यांग इंसान की बदला लेने की प्लानिंग दिलचस्पी बनाए रखती है।

ये रही कमियां…

फिल्म की कहानी और एक्शन एक ओर सभी का मन मोह लेती है वहीं दूसरी ओर इसमें हमें कई तरह के कमियां भी नजर आती है।  दिव्यांग होते हुए भी रितिक रोशन इतना कुछ करते नजर आते हैं जो सामान्य जीवन में मुमकिन नहीं होता है कहानी की यही बात आपको कहानी से जोड़ते हुए नजर नहीं आएगी वहीं रितिक रोशन की डांस की बात की जाए या फिर बदला लेने के दौरान किए गए कई कारनामें ऐसे भी है जो सामान्य दिव्यांग व्यक्ति आसानी से नहीं कर सकता  सीधे तौर पर कह सकते हैं  फिल्म में जरूरत से ज्यादा दिखाया गया है।

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