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फिल्म: रंगून

डायरेक्टर: विशाल भारद्वाज

स्टार कास्ट: कंगना रणौत, शाहिद कपूर, शैफ अली खान।

रेटिंग: 3.5/5

समय: 2 hour 44 minute

क्या आप भी रोमांस और वॉर का एक नया और तगड़ा अनुभव लेना चाहते है तो आपको विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘रंगून’ जरूर देखना चाहिए। कंगना रणौत, शाहिद कपूर और शैफ अली खान की तिगड़ी ने इस फिल्म में दर्शकों को फ़िल्मी दुनिया का एक नया अंदाज दिखाने की कोशिश की है।

आइये जानते है, ‘रंगून‘ में क्या रहा खास तो किसकी रही कमी.. कौन रहा अच्छा एक्टर तो स्टोरी में किसने किया कमाल…

स्टोरी: रंगून की कहानी सन 1943 पर आधारित है। दुसरा विश्व युद्ध जोरो पर है तो वहीँ भारत में भी आजादी की लड़ाई अपने पूरे उफान पर है। आजादी में जहां एक तरफ गांधी के अहिंसक आंदोलन का जोर है तो दूसरी तरफ सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज भी अपने तरीके से अंग्रेजों को दाँतों तले अंगूठे चबाने के प्रयास में है।
आजाद हिंद फौज जापानी सेना की मदद से बर्मा के रास्ते भारत में प्रवेश करने के लिए तैयार है तो ब्रिटिश सेना भी सीमा पर पूरी तैयारी के साथ डटी हुयी है। ब्रिटिश सेना में भारतीय सैनिक भी मौजूद है। 
फिल्म की कहानी तीन किरदारों के इर्द गिर्द घूमती है। जिसमे नवाब मलिक (शाहिद कपूर) ब्रिटिश सेना का एक सैनिक है, रुसी बिलीमोरिया (सैफ अली खान) एक स्टूडियो का मालिक है जो एक्शन स्टार रह चुका है और जूलिया (कंगना रनौत) जो की एक लोकप्रिय अभिनेत्री है, जिसका बोलबाला लोगो के बीच है।

फिल्म में रूसी, जुली को ब्रिटिश आर्मी के मोर्चे पर मनोरंजन के लिए भेजता है, जुली की सुरक्षा के लिए नवाब मालिक को नियुक्त किया जाता है। नवाब मलिक और रुसी, दोनों ही जुली के प्यार में पागल होते है। जुली और नवाब मलिक दुश्मन के इलाके में फस जाते है, इसी बीच कई तरह की मुश्किलें आती है तो दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ते रहता है।

सेकंड हाफ में रोमांस, दिलचस्पी और गंभीरता बढ़ती है, जो दर्शकों को बांधे रखते है और सोचने पर मजबूर करते है।
खास बात: हर एक्टर ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। गाने आपको बांधे रखते है तो वहीँ पूरी कहानी और फिल्म में उत्सुकता बनी रहती है । आदर्शवादी और दृढ़ सैनिक के किरदार में शाहिद शानदार हैं. कंगना जूलिया के किरदार को निभाती ही नहीं जीती भी हैं। रंगून जब तक चलती है- एक शानदार अनुभव है। युद्ध और इतिहास को परे रखिए लेकिन अगर प्यार की बात करें- प्यार जो आपको कंट्रोल करना चाहता है, प्यार जिसके सहारे के बिना आप जी नहीं सकते, प्यार जो अधूरा होता है, प्यार जिसकी इजाजत नहीं है – तो विशाल भारद्वाज की यह फिल्म लाजवाब है।
कमजोर कड़ी: फिल्म के कई सीन बेअसर नजर आते है। कुछ सीन बेवजह डूबे से नजर आते है तो साथ ही किसी कार्टून फिल्म की तरह फ़ालतू से भी लगते है। किरदारों के बीच की केमिस्ट्री को और अधिक प्रभावी बनायाजा सकता था।

By admin

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