Producer: सिद्धार्थ रॉय कपूर/आमिर खान

Director:  नितेश तिवारी

Star cast: आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख, सानिया मल्होत्रा

Rating: 4.5/5

samacharvideo: आमिर खान की 3 idiot, तारे जमीं पर, फ़ना… ऐसी फिल्में तो आपने देखी जी होगी। तो आपको बता दे की आमिर खान की ये फिल्म भी इन फिल्मों की टक्कर की है। छोरिया छोरो से कम थोड़े ही होती है,यह बात आमिर ने अपनी फिल्म से साबित कर दी। यदि आप कोई जरूरी काम कर रहे है तो भी आपको ये फिल्म उस जरुरी काम की तरह ही समझ कर देखना चाहिए। आप फिल्म देखने के बाद गर्व से कह सकते है कि ‘भई दंगल तो पैसा वसूल है।’

फिल्म की कहानी आपको इसलिए भी अच्छी लगेगी कि, इसमें किसी तरह का एक्स्ट्रा दिखावा नही किया गया है। न ही एक्स्ट्रा एक्शन नजर आएगा। फिल्म को आप अपने आप से जोड़ सकते है क्योकि फिल्म जमीनी स्तर पर बनाई गई है। फिर को बहुत साधारण तरीके से दर्शाया गया है, जो आपको अपनी ओर जरूर आकर्षित करेगी। वहीँ फिल्म आपको आखिरी तक बांध कर रखेगी और आपके उत्साह को कम नही होने देगी। वहीँ ये फिल्म आपके अंदर देश प्रेम को जाग्रत करने का एहसास भी दिलाती है।

Story: दंगल की स्टोरी की बात करे तो यह फिल्म हरियाणा की सच्ची जीवन कथा पर आधारित है। आमिर खान ने एक ऐसे बाप का रोल निभाया है जो अपने कुश्ती के करियर के बाद उम्म्मीद करता है कि उसका सपना उसका बेटा पूरा करेगा। पर ऐसा नही होता, एक के बाद एक चार बेटियां जन्म लेती है। निराश और दुखी आमिर खान को एहसास होता है कि उसकी बेटियां भी उसका सपना पूरा कर सकती है। इसके बाद बस वे जुट जाते है। और सफल होकर ही मानते है।

Acting: आमिर खान के साथ साथ साक्षी तंवर ने भी इस फिल्म में जान डाल दी। हर एक किरदार अपनी जगह पर फिट बैठता है। हर कोई अपने किरदार को बहुत बेहतर तारिके से निभाने में सफल हो पाया है। वहीँ फिल्म में गीता और बबिता का किरदार निभाने वाली दोनों लडकियां भी एक्टिंग के मामले में तारीफ़ पाने की हकदार है। एंकर खान की एक्टिंग पर ध्यान दे तो आमिर ने अपनी एक्टिंग से अफले ही सबको मोह रखा है, ओर इस फिल्म में आप आमिर खान की एक्टिंग से मन्त्र मुग्ध हो जाएंगे।

Direction: फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी की यह तीसरी फिल्म थी। उन्होंने दंगल में शाबित कर दिया है कि वे bollywood के किसी सबसे सफल डायरेक्टर से कम नही है। फिल्म के हर हिस्से में आपको गहराई मिलेगी। भावनाओ और जज्बातों का अनोखा संगम मिलेगा, जो डायरेक्शन हर डायरेक्टर का ही कमाल है।

Cinematography: कैमरा एंगल और सिनेमेटोग्राफी की बात करे तो, कुश्ती को इससे पहले शायद ही कभी इस तरीके से दर्शाया गया हो। वही अन्य दृश्यो पर ध्यान दे तो दंगल का हर एक टुकड़ा आपको कैमरे की कलाकारी का नमूना पेश करते नजर आएगा।


Plus Point:
दंगल में आपको किसी तरह की कोई कमी महसूस नही होगी। डायलॉग की सही डिलीवरी के साथ गाँव का जमीनी स्तर पर दिखाना। गानों का स्थिति के हिसाब से परफेक्ट बैठना। जूनून और जिद का अलग अंदाज। ये सब कुछ फिल्म को अलग और बेहतर भी बनाते है।

Negetive Point: फिल्म की सारी बातों पर ध्यान दिया जाए तो फिल्म सब तरह से पूर्ण नजर आती है, फिर भी कुछ कमी आपको नजर आ सकती है। जैसे फिल्म में मुख्य किरदारों के अलावा साइड किरदारों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। जैसे गीता और बबिता की छोटी बहनों को..! वही फिल्म में आपको राष्ट्रगान गाते दिखाया जाएगा, जो की एक पब्लिक स्टंट और आज के दौर के हिसाब से फिल्म में डाला गया है। यह ऐसा मालूम होता है जैसे जबरन इसे फिल्म में ठुस दिया गया हो।

खैर, आपको के फिल्म कम से कम एक बार तो जरूर देखना ही चाहिए। नही देखोगे तो आप एक नायाब फिल्म को नही देखने का दर्द सहने के लिए तैयार रहिये।

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